रूबरू तेरे अक्स को कोई भी निहारेगा मगर वो तसव्वुर में बसे तेरे वजूद को बेइंतहा कैसे चाहेगा। ज़िंदगी में क़िस्मत से कोई भी दर्ज हो कर तेरा हाथ थाम पायेगा बिन जुड़े तेरी लकीरों से कौन ता उम्र साथ निभायेगा। हर रिश्ता इक नाम से तुझ संग तेरा हो जायेगा बिन नाते कौन तेरी प्रीत की रीत निभायेगा। कर लो जाओ तालाश इक ज़िंदगी बसर किसी में थक जाओगे तरस जाओगे हम सी मोहब्बत तुम्हें कोई भी कर ना पायेगा।❤️❤️
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कोई सलीक़ा नहीं होता ख़्वाबों की ताबीर में फिर भी मायूस मन को इक उम्मीद बँधा देता है। कोई ज़ायक़ा नहीं होता लफ़्ज़ों की उसरत में फिर भी बेचैन रूहों में इक सुकूं उतार देता है। कोई पहचान नहीं होती यादों की जात में फिर भी झोंका उसके तसव्वुर का भरी महफ़िल में तन्हा करा देता है। कोई रंग नहीं होता बारिश के पानी का फिर भी फ़िज़ा को रंगीन बना देता है।❤️❤️
Wow thats amazing post queen of shayari apke jaisa koi nahi
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