हर लम्हा तेरी ही याद है क्या याद है.. कुछ याद नहीं। याद है तेरी खुशबू मुझसे ही लिपटी रहती है क्यूं ये याद नहीं। याद है तेरा हर एहसास तू दिल में है नसीब में नहीं... ये मुझे याद नहीं याद है मैं प्रीत हूं सिर्फ तेरी हूं हां बेशक... मगर कयूं हूं ना..... अब ये याद नहीं।❤️❤️
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चलो इक रोज़ फिर मुलाकात करेंगे तेरे आने पर.... कुछ बातें कुछ हाल ए दिल तेरे रूबरू बयां करेंगे। अरसा हो गया हंसी के लिबास तले कुछ अश्कों को छुपाये हुए इस बार तुमसे मिल तेरा कांधा गीला करेंगे। यूं ही बेसबब सुस्त सी गुज़र रही है जिंदगी खुद संग तुम मिलो तो.... कुछ ख्वाहिशों को तेरे इश्क से आबाद करेंगे। बहुत तन्हा खामोश वक्त की कैद में है जिंदगी तुम आओ.... हम प्रीत के लम्हों को नजरबंद करेंगे।❤️❤️
सिर्फ़ ........अपने हैं मेरे ज़हन में क़ैद कुछ ख़्वाब यूँ बंदी हैं कि किसी भी सूरत रिहा किये नहीं जाते। कुछ अल्फ़ाज़ .....नहीं उतरते पन्नों की सतह पे कुछ इस क़दर नम हैं कि इक नज़्म में लिखे नहीं जाते। मुसकुराहटें कुछ यूँ क़ब्ज़ा रखती हैं लबों रूखसार पर कुछ दर्द अश्कों में बहाये नहीं जाते। कुछ रिश्ते प्रीत के.......सिर्फ़ रूह से होते हैं बावस्ता कोई नाम नहीं उनके अक्स के बस एहसासों से महसूस होते हैं छू के उनके तारूख दिए नहीं जाते।❤️❤️

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